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कथाकार अशोक कुमार पाण्डेय की साहित्यिक चेतना Urdu Bazaar

कथाकार अशोक कुमार पाण्डेय की साहित्यिक चेतना

चूंकि मैं इतिहास का विद्यार्थी हूँ और ये मेरा पसंदीदा विषय भी है इस नाते मुझे अशोक कुमार पाण्डेय कि किताब "कश्मीरनामा" नें सर्वप्रथम अपनी ओर आकर्षित किया था आकर्षित होने का एक और प्रमुख कारण इस पुस्तक का शीर्षक भी था। दरअसल स्कूली दिनों में इतिहास विषय पढ़ते वक्त 'अकबरनामा' एवं 'बाबरनामा' जैसी पुस्तकों का ज़िक्र आने पर दिलचस्पी थोड़ा बढ़ जाती थी शायद इसी का नतीजा मेरी व्यक्तिगत लाइब्रेरी में 'कश्मीरनामा' है।

इस पुस्तक के बाद जब मुझे मेरे एक मित्र नें उनके नवीन कहानी संग्रह के बारे में बताया तो मैं थोड़ा सा आश्चर्यचकित हुआ। इसके दो प्रमुख कारण थे, पहला तो इस कहानी संग्रह का शीर्षक जो अपने आप में ही इतना बगावती है कि किसी भी समर्पित पाठक को अपनी ओर आसानी से आकर्षित कर ले और दूसरा यह कि एक बेहद ही महीन शोधपरक पुस्तक के लेखक के कहानी संग्रह का आखिर विषय चयन क्या और कैसा हो सकता है ?

तो इसी उधेड़बुन से निकलकर आई ये कहानी संग्रह 'इस देश में मिलिट्री शासन लगा देना चाहिए।' कल ही मैंने इस संग्रह को पूरी तरह से पढ़कर समाप्त किया है और बेचैनी देखिए की आज ये समीक्षा लिख रहा हूँ।

यदि मुझसे कोई अशोक जी के विषय में ये प्रश्न करे कि वो एक कहानीकार के रूप में कैसे रचनाकार हैं तो मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा कि उनकी कहानियों के भीतर सआदत हसन मंटो कि बगावत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला कि बेचैनी और प्रेमचंद का जमीनी परिवेश कूट-कूट कर भरा मिलेगा जो आपको शुरू से लेकर अंत तक अपनें साथ पूरी तरह से बांधे रखेगा।

चूंकि संग्रह में से मेरा सर्वाधिक प्रिय खण्ड नौंवा "और कितने यौवन चाहिए ययाति?" है किंतु पसंदीदा अंश पहले ही खण्ड से उद्धृत है। आईए  देखते हैं किताब कि पहली लघु कथा 'इस देश में मिलिट्री शासन लगा देना चाहिए' का एक अंश:

"पत्नी की याद आने के बाद मुझे थोड़ी और शराब पीने का मन करने लगा। मैने पर्स देखा तो बस तीन सौ रूपये बचे थे। मैने सोचा कि चलो देशी का क्वार्टर ही पी लेते हैं। अंग्रेजी की बोतल तो आर्मी वाले तीन सौ की देते हैं। मुझे गुस्सा आया कि ये आर्मी वाले क्वार्टर क्यों नहीं बेचते।

मुझे बहुत गुस्सा आया। मैंने सोच लिया कि चुनाव में इस बार विपक्षी पार्टी को वोट दूंगा।

फिर याद आया कि सरकार थी तब भी आर्मी वाले क्वार्टर नहीं बेचते थे। मुझे बहुत गुस्सा आया। मैंने कहा कि "इस देश में मिलिट्री शासन लागू कर देना चाहिए।

फिर मैं देशी खरीदने चला गया।"

एक कथाकार के रूप में अशोक कुमार पाण्डेय आगामी वर्षों में नये कीर्तिमान स्थापित करेंगे इस भरोसे के साथ मैं आपको उनकी किताबों के प्रति आस्वस्त करता हूँ।

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