मंटो एक बदनाम लेखक- किस्से-कहानियों की समीक्षा Urdu Bazaar

मंटो एक बदनाम लेखक- किस्से-कहानियों की समीक्षा

अगर हम उर्दू साहित्य की बात करें तो मंटो एक बदनाम लेखक हैl इसका एक कारण यह भी है की वह एक ऐसे समय पर लिख रहे थे जब समाज में प्रगतिशील लोगों ऐंव लेखकों को गलत समझा जाता थाl लोगों का मानना था कि ऐसे लेखक और लोग समाज को गन्दा करना चाहते हैंl

 

मैंने सिर्फ यह अफसाने पढ़े हैं और शायद इनकी समालोचना करने में पूरी तरह सक्षम भी नहीं हूं मगर कोशिश करना चाहती हूं। आशा करती हूं कि आपको मेरा यह प्रयास अच्छा लगेगा। चलिए मंटो के अल्फाज़ से ही शुरू करती हूं।

 

"मैं अफसाना नहीं लिखता,

अफसाना मुझे लिखता है, कभी कभी हैरत होती है कि, 

यह कौन है जिसने इतने अच्छे अफसाने लिखे हैं?"

-सआदत हसन मंटो

 

क्या आप जानते हैं कि मंटो कोई भी कहानी लिखने से पहले कागज़ पर ७८६ (786) लिखते थे और उसके बाद कहानी लिखी जाती थी? मंटो न ही धार्मिक प्रवत्ति के थे और ना ही आस्तिक। लेखन उनका प्राथमिक और एकमात्र धर्म था और सच को दर्शाना उनके लेखन का मूल उद्देशय। अपने बेबाक और मसखरे अंदाज़, के लिए जाने जाने वाले मंटो की कहानियां पाठक के दिलो-दिमाग पर एक गहरी छाप छोड़ जाती हैं मगर सच की एक खासियत यह भी है कि वो हर किसी को रास नहीं आता और इसी लिए मंटो पर अश्लीलता के कई मुकदमे चले। कई दफा सोचती हूं तो लगता है कि अगर वह आज के समय में जन्मे होते तो शायद उन पर एक भी मुकदमा न चलता (कृपा न्यूज़ चैनल वालों की)।

 

यह किताब मात्र १४४ (144) पन्नों में मंटो के लेखन की खूसूरती को दर्शाती हैं। किताब की शुरुआत में विनोद भट्ट द्वारा लिखे गए दो निबंध- 'बेखौफ बेफिक्रा इंसान' और '786' मंटो के जीवन के कई दिलचस्प किस्से, कहानियां और उनके साहित्य से जुड़ी कई बातों से पाठक को रूबरू करवाते हैं। यह निबंध हमें यह भी बताते हैं कि मंटो ने विनोद भट्ट के जीवन को किस तरह प्रभावित किया हैl उसके साथ साथ इस किताब में मंटो के छह बहुत ही दिलचस्प अफसाने भी हैं।

 

मुझे इन कहानियों में जो चीज़ सबसे ज़्यादा पसंद आयी वह यह थी कि यह बहुत ही दिलचस्प मोड़ पर ख़त्म होती हैं। 

 

'नंगी आवाज़ें' सोसायटी का दो मुहे रवैया और दूसरों की और प्रेम के अभाव को दर्शाती है।

'टोबा टेक सिंह' विभाजन का पागलपन और सत्ता के भूखे लोगों के द्वारा किए गए फैसलों का लोगों के साथ हुई क्रूरता को दर्शाती है।

'धुआं' एक ऐसे विषय पर है जिस पर बात करने में लोग आज भी संकोच करते हैं (LGBTQ)।

'काली सलवार' में मंटो एक सेक्स वर्कर के दृष्टकोण से हमें बहुत सी चीजें विश्लेषण करने पर मजबूर करते है।

'ठंडा गोश्त' मेरी सबसे पसंदीदा कहानी रही। यह मंटो की सबसे प्रसिद्ध कहानियों में से एक है।

'खोल दो' भी देश के बंटवारे के पागलपन को दर्शाती है और यह कहानी पाठक के दिमाग पर एक गहरी छाप छोड़ जाती है।

 

यह किताब- 'मंटो एक बदनाम लेखक' इतनी खूबसूरत है कि मेरा तारीफ करना इसका अपमान करने जैसा होगा। बस इतना कहूंगी कि आपको यह किताब ज़रूर पढ़नी चाहिए। आपको इसे पढ़ना चाहिए ताकि आप मंटो की सोच से रूबरू हो सकेंl मंटो की सोच और उसकी कहानियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी वे तब थी जब वे लिखी गयी थीl चाहे वे धर्म के नाम पर राजनीति करने की बात हो या औरतों से जुड़ी कोई बात मंटो की सोच और उनके लिखावट की सच्चाई हैरान कर देने वाली हैl

 

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3 comments

मंटो एक बदनाम लेखक..

विनोद भट्ट द्वारा संपादित यह किताब मंटो के व्यक्तित्व एवं कृतीत्व को न्याय देने वाली हैं ! साथ ही यहां समाज के यथार्थ को दर्शाया गया हैं । मंटो के अफसानो पर सवाल उठाने वाले आलोचल एवं समाज स्वास्थ्य का झुठा राग अलापनेवाले कइ ठेकेदारो का षड्यंत्र स्पष्ट रूप से दिखाई देता हैं। भला संस्कृती, सभ्यता का कितना भी शोर मचाया जाये और लेखक को बदनाम करने का प्रयास किया जाये फिर भी हकीकत को कैसे झुटलाया जा सक्त हैं। मुझे स्वयं मंटो का वक्तव्य सटीक लगता हैं वे लिखते हैं कि, “अगर आपको मेरी कहानीयां अश्लील या गंदी लगती हैं, तो जिस समाज में आप रह रहे हैं, वह अश्लील और गंदा है।मेरी कहानियां तो केवल सच दर्शाती हैं..” तो लेखक को जुर्मवार कैसे ठहराया जा सकता हैं? मंटो की कहानिया समाज के पाखंड का पर्दाफाश करती हैं इसी कारण शायद वह आलोचक एवं संकीर्ण मानसिकता की सोच रखनेवालो को चुभती हैं! मंटो का निजी जीवन कैसा भी तंग रहा हो लेकीन वे एक लेखक के तौर पर समाज में व्याप्त बुराईयो पर बिना डरे अपनी कलम द्वारा वार कर अपना साहित्यिक दायित्व निभाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं!

(प्रा.डॉ. न.पु.काळे)

डॉ.न.पु.काळे

मंटो एक बदनाम लेखक..

विनोद भट्ट द्वारा संपादित यह किताब मंटो के व्यक्तित्व एवं कृतीत्व को न्याय देने वाली हैं ! साथ ही यहां समाज के यथार्थ को दर्शाया गया हैं । मंटो के अफसानो पर सवाल उठाने वाले आलोचल एवं समाज स्वास्थ्य का झुठा राग अलापनेवाले कइ ठेकेदारो का षड्यंत्र स्पष्ट रूप से दिखाई देता हैं। भला संस्कृती, सभ्यता का कितना भी शोर मचाया जाये और लेखक को बदनाम करने का प्रयास किया जाये फिर भी हकीकत को कैसे झुटलाया जा सक्त हैं। मुझे स्वयं मंटो का वक्तव्य सटीक लगता हैं वे लिखते हैं कि, “अगर आपको मेरी कहानीयां अश्लील या गंदी लगती हैं, तो जिस समाज में आप रह रहे हैं, वह अश्लील और गंदा है।मेरी कहानियां तो केवल सच दर्शाती हैं..” तो लेखक को जुर्मवार कैसे ठहराया जा सकता हैं? मंटो की कहानिया समाज के पाखंड का पर्दाफाश करती हैं इसी कारण शायद वह आलोचक एवं संकीर्ण मानसिकता की सोच रखनेवालो को चुभती हैं! मंटो का निजी जीवन कैसा भी तंग रहा हो लेकीन वे एक लेखक के तौर पर समाज में व्याप्त बुराईयो पर बिना डरे अपनी कलम द्वारा वार कर अपना साहित्यिक दायित्व निभाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं!

(प्रा.डॉ. न.पु.काळे)

डॉ.न.पु.काळे

मंटो एक बदनाम लेखक..

विनोद भट्ट द्वारा संपादित यह किताब मंटो के व्यक्तित्व एवं कृतीत्व को न्याय देने वाली हैं ! साथ ही यहां समाज के यथार्थ को दर्शाया गया हैं । मंटो के अफसानो पर सवाल उठाने वाले आलोचल एवं समाज स्वास्थ्य का झुठा राग अलापनेवाले कइ ठेकेदारो का षड्यंत्र स्पष्ट रूप से दिखाई देता हैं। भला संस्कृती, सभ्यता का कितना भी शोर मचाया जाये और लेखक को बदनाम करने का प्रयास किया जाये फिर भी हकीकत को कैसे झुटलाया जा सक्त हैं। मुझे स्वयं मंटो का वक्तव्य सटीक लगता हैं वे लिखते हैं कि, “अगर आपको मेरी कहानीयां अश्लील या गंदी लगती हैं, तो जिस समाज में आप रह रहे हैं, वह अश्लील और गंदा है।मेरी कहानियां तो केवल सच दर्शाती हैं..” तो लेखक को जुर्मवार कैसे ठहराया जा सकता हैं? मंटो की कहानिया समाज के पाखंड का पर्दाफाश करती हैं इसी कारण शायद वह आलोचक एवं संकीर्ण मानसिकता की सोच रखनेवालो को चुभती हैं! मंटो का निजी जीवन कैसा भी तंग रहा हो लेकीन वे एक लेखक के तौर पर समाज में व्याप्त बुराईयो पर बिना डरे अपनी कलम द्वारा वार कर अपना साहित्यिक दायित्व निभाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं!

(प्रा.डॉ. न.पु.काळे)

डॉ.न.पु.काळे

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