Prem Ya Vasna

by Leo Tolstoy

Rs 125.00

PaperbackPaperback
Description
इस पुस्तक में व्यभिचारी और सदाचारी व्यक्ति का भेद करते हुए एक ऐसी कथा का ताना-बाना बुना गया है, जो हरेक युग में प्रासंगिक रहेगी। इसके लेखक स्पष्ट लिखते हैं कि जो भी वासना की दृष्टि से औरत को देखता है, समझ लो कि वह अपने दिल में उससे व्यभिचार कर चुका है|
Reviews

Customer Reviews

No reviews yet Write a review