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Adhnanga Fakeer । अधनंगा फ़क़ीर

by Sagar, Dayashankar Shukla

Rs 199.00 Rs 185.00 Save ₹14.00 (7%)

Description

Author: Sagar, Dayashankar Shukla

Languages: Hindi

Number Of Pages: 240

Binding: Paperback

Package Dimensions: 7.7 x 5.2 x 0.9 inches

Release Date: 25-10-2021

Details: Product Description किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति का जीवन-चरित्र उसके सार्वजनिक और निजी जीवन के बीच का द्वंद्व है। हर व्यक्ति अपने कंट्रास्ट में जीता है। महात्मा गांधी भी इससे अछूते नहीं रहे। महात्मा गांधी के जीवन में विचित्र विरोधाभास था। अपने सार्वजनिक जीवन में महात्मा की छवि एक कठोर और सिद्धांत-प्रिय आदमी की थी। एक स्वभाव से जिद्दी आदमी जो अपनी बात मनवाने के लिए वह किसी भी क्षण अपने प्राण जोखिम में डाल सकता है। एक ऐसा आदमी जो मानता था कि विवाहितों को भी एक कोठरी में, एक चारपाई पर नहीं सोना चाहिए। वो खुद ऐसे प्रयोग के लिए तैयार हो गए जो दूसरों के लिए सवर्था वर्जित थे। आधा दर्जन से ज्यादा लड़कियों के साथ नग्नावस्था में सोने की बात महात्मा ने खुद अपने पत्रों में स्वीकार की है। तो फिर वे किस तरह का ब्रह्मचर्य का प्रयोग करना चाहते थे? उसका औचित्य क्या था? करीबी मित्रों की तीखी आलोचना के बाद वे ये प्रयोग रोक देते। लेकिन वे इसे फिर शुरू कर देते। आखिर ये प्रयोग क्या था? इससे क्या हासिल हुआ? 'अधनंगा फ़क़ीर' इन्हीं पहलुओं का मनोवैज्ञानिक धरातल पर पूरी तटस्थता और ईमानदारी से पड़ताल करती है। About the Author देवरिया, उप्र में जन्मे दयाशंकर शुक्ल सागर दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, अमर उजाला जैसे कई प्रतिष्ठत समाचारपत्रों से जुड़े और उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में स्थानीय संपादक रहे हैं। दयाशंकर देश में पिछले 25 साल से जनसरोकार की पत्रकारिता से सक्रिय रूप में जुड़े हुए हैं। बतौर रिपोर्टर इन्होंने कई बड़ी ख़बरें ब्रेक की हैं, जिनमें अमिताभ बच्चन: बाराबंकी में फर्जी ज़मीन घोटाला, नरेगा घोटाला, सिलाई मशीन घोटाला और बेगुनाह मुसलमानों को आतंकी बताने की साज़िश, आदि शामिल हैं। श्री शुक्ल ने 2018 में कश्मीर के आतंक प्रभावित पुलवामा, अनंतनाग, शोपियाँ जैसे संवेदनशील इलाक़ों से लाइव रिपोर्टिंग की। इस कॉन्फ़्लिक्ट ज़ोन पर उनकी रिपोर्ट्स के आधार पर आतंकवादियों के शवों को उनके घर वालों को सौंपने पर केंद्र सरकार को रोक लगानी पड़ी ताकि वे जुलूस न निकाल सकें। ज़मीनी और जनसरोकार से जुड़ी ख़बरों के लिए श्री शुक्ल को तीन-तीन बार ‘केसी कुलिश इंटरनेशनल एक्सीलेंस इन जर्नलिज़्म अवार्ड’ मिल चुका है। एक अवार्ड तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाथों नई दिल्ली में प्रदान किया गया था। भारतीय सीमा पर हो रही नशीले पदार्थों की तस्करी पर इनकी एक खोजपरक रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2012 के जिनेवा कन्वेशन में पेश की गई थी। इन्होंने वहाँ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताया कि किस तरह नेपाल, पाकिस्तान और चीन सीमा से भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी हो रही है। पाकिस्तान ने इस रिपोर्ट को रॉ की साज़िश करार दिया था। श्री शुक्ल को लीडरशिप प्रोग्राम के तहत अमेरिका मोरलैंड की प्रतिष्ठित जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी से मानद उपाधि मिली है। अकादमिक फ़ैलोशिप के तहत कई देशों की यात्रा कर चुके दयाशंकर शुक्ल सागर का एक यात्रा संस्मरण शीघ्र प्रकाश्य है।