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Agha Hashra Kashmiri Ke Chuninda Drame : Vols. 1-2

by Anis Azmi
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पारसी थिएटर हमारी बहुमूल्य विरासत है, इसलिए हमें इसकी हिफाजत भी करनी है । राष्ट्रीय नाट्‌य विद्यालय में पारसी नाटकों के मंचन की परम्परा रही है । यह भी एक सत्य हे कि उत्तर भारत के सभी नगरों और महानगरों में रंगकर्मी इस परम्परा से जुड़ने पर सुख और संतोष का अनुभव करते हैं । शायद यही कारण है कि देश-भर के रंगकर्मी समय-समय पर पारसी नाटकों, विशेषकर आग हश्र काश्मीरी के नाटकों की माँग करते रहते हैं । अप्रैल 2004 ई. आग हश्र की 1 २5वीं पुण्यतिथि है । इस अवसर पर स्वर्गीय आगा हश्र काश्मीरी को श्रद्धांजलि के रूप में उनके नाटकों को रंगकर्मियों तक पहुँचाया जा रहा है जो कल तक दुर्लभ थे । दो खंडों की इस पुस्तक में आगा हश्र के दस चर्चित नाटकों के साथ उनके जीवन व योगदान पर एक लम्बा शोधपरक लेख भी शामिल है । पहले खंड में 'असीर-ए-हिर्स', 'सफेद खून', 'सैद-ए-हवस' तथा 'खूबसूरत बला' नाटकों को शामिल किया गया है । दूसरे खंड में हैं : 'सिल्वर किंग', 'यहूदी की लड़की', 'आँख का नशा', 'बिल्वा मंगल', 'सीता बनबास', तथा 'रुस्तम-ओ-सोहराब' । इन नाटकों के लिप्यंतरण में शब्दार्थ के साथ- साथ इस बात का भी पूरा ध्यान रखा गया है कि उर्दू शब्दों का यथासंभव सही उच्चारण हो सके और खासतौर पर अभिनेताओं तथा रंगकर्मियों को संवाद अदायगी में कोई दिक्कत पेश न आए ।