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Bagugoshe

Swadesh Deepak (Author)

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Description
इन कहानियों में यादें हैं और विस्मृतियां भी, विश्वास कर लेने का साहस है तो अविश्वास का सलीका भी, मिठास है तो कसैलापन भी है। ऊपर से शांत और एकसार दिखने वाली सतह को स्वदेश दीपक इस तरह उधेड़ते हैं कि भीतर का सारा विद्रूप, सारी दरारें और बदसूरती साफ दिखने लगती है। सत्ता और ताकत का ज़रा भी सुराग दिखाई दे, उनकी निगाह उसी तरफ उठती है और बेध देती है। आलोचना और व्यंग्य की इतनी गहरी धार दुर्लभ है।
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