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Chitrakala Kavita Ke Deshe

by Sunil Gangopadhyay
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Product Description
बांग्ला के महान कथाकार सुनील गंगोपाध्याय प्रारम्भिक जीवन से ही भ्रमण-प्रेमी रहे । उन्होंने लिखा भी है, ‘बचपन से ही मेरा सपना विश्व-भ्रमण का रहा है । कई अलस दोपहरियों में उन्होंने कई देशों के नक्शे और ग्लोब रखकर पृथ्वी-परिक्रमा के दिवास्वप्न देखे है । ‘चित्रकला कविता के देशे’ (मूल नाम ‘छविर देशे : कवितार देशे’) पुस्तक में उनकी फ्रांस-यात्रा का रोचक वर्णन है । दरअसल इस पुस्तक का ढाँचा भ्रमण-वृत्तान्त का है किन्तु विधागत रूढ़ अर्थों में यह यात्रा-वृत्तान्त नहीं है । असल में उन्हें अपनी युवावस्था में आयोबा विश्वविद्यालय में आयोजित कविता कार्यशाला में नौ मास रहने की वृत्ति मिली थी । यह आमंत्रण प्रसिद्द कवि पॉल ऐजेल की ओर से मिला था । इन नौ महीनों में सुनील गंगोपाध्याय ने वहाँ के कवियों, चित्रकारों, संगीतज्ञों, नाटककारों, नर्तकियों से जो भेंट की, इस पुस्तक में उन्ही का वर्णन है । किसी ने कहा था, हर शिल्पी की दो मातृभूमियाँ होती हैं-एक उसका अपना देश और दूसरा फ़्रांस । शिल्पी से सिर्फ चित्रकार थे, वैसे ही यहाँ रिम्बो, वेर्लेन, बोदलेयर, मालार्मे, वेलरी, अपोलिनियर और ऑरि मिसोर जैसे कवी भी हुए हैं । इसलिए फ्रांस ही ऐसा देश है जिसकी आत्मा का अगर वर्णन किया जाए तो उसमें छवि और कविता का संसार आना अनिवार्य है । इस पुस्तक की एक विशेषता और है, वह है इसमें अद्दंत प्रवाहित सुनील और एक फ्रांसीसी युवती की प्रेम कहानी, जिसे सुनील ने बिना कुछ छिपाए बयान किया है । यह पुस्तक भ्रमण का तो आनन्द देती ही है, साथ ही फ्रांसीसी साहित्य, संस्कृति, कला, संगीत और कविता से जुड़े जीवन के रहस्यों को भी खोलती है ।