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Chullu Bhar Kahaani । चुल्लू भर कहानी

by Mishra, Abhay

Rs 150.00 Rs 135.00 Save ₹15.00 (10%)

Description

Author: Mishra, Abhay

Languages: Hindi

Number Of Pages: 116

Binding: Paperback

Package Dimensions: 7.8 x 5.1 x 0.3 inches

Release Date: 13-12-2021

Details: Product Description यह कहानी संग्रह, अभय मिश्र और पंकज रामेन्दु लेखक द्वय की साथ में दूसरी किताब है। इससे पहले इनकी पुस्तक ‘दर दर गंगे’ को पाठकों ने काफी सराहा गया। यह पुस्तक आज भी गंगा पर पढ़ने वाली पुस्तकों में अहम स्थान रखती है। दोनों लेखक नदियों पर लिखने वाले कहानीकार-पत्रकार हैं, जो अपनी अनूठी क़िस्सागोई से विषय की गहराई को आँकते रहे हैं। यह पुस्तक भी पाँच कहानियों का संग्रह है, जिसमें कहीं भी उनका विषय यानी ‘नदी’ छूटती नहीं है, बल्कि कहीं रिवाज, अपराध, घटनाएँ और अंतर्मन के रूप में कहानी के साथ बहती है। पुस्तक का नाम ‘चुल्लू भर कहानी’ रखने का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि चाहे कहानी हो या हक़ीक़त या फिर हक़ीक़त बयान करती कहानी हो, इंसान जो हासिल करता है वह चुल्लू भर ही है। ठीके वैसे ही जैसे मास्साब पढ़ाते बहुत हैं लेकिन समझ में चुल्लू भर ही आता है। About the Author अभय मिश्र और पंकज रामेन्दु नदियों के किनारे विचरते हैं, नदियों को सुनते, गुनते और बुनते हैं। क़रीब 15 साल पहले शुरू हुआ यह सफ़र थमती जा रही नदियों के पथ पर निरंतर जारी है, और इस सफ़र में वहाँ के समाज को समझने की कोशिश धीरे-धीरे प्रवाहित हो रही है। नदी और समाज के ताने-बाने के बीच ये दर्ज करते हैं कि कैसे हम अपनी नदी को धन्यवाद कहना भूल गए हैं। इससे पहले ये ‘दर दर गंगे’ को पाठकों के समक्ष रख चुके हैं, जो फ़िक्शनल ट्रेवलॉग के रूप में इनका पहला सफल प्रयोग रहा। इसी तरह अभय मिश्र द्वारा लिखा गया ‘माटी मानुष चून’ भविष्य की नदी को दिखाता उपन्यास है। ‘चुल्लू भर कहानी’ कहने का तरीक़ा भी थोड़ा अनोखा है। इसमें पुस्तक की शुरुआत कहानी से होती है और उसके बाद आप पुस्तक की भूमिका पढ़ते हैं। लेखकद्वय मूलतः पत्रकार हैं और नदी का वह दर्द जो शब्दसीमा के चलते ख़बरों में नहीं समा पाता उसे अपनी कहानियों में बसा लेते हैं। अभय को पर्यावरण पत्रकारिता के क्षेत्र में दिए जाने वाले उत्कृष्ट सम्मान अनुपम मिश्र मेमोरियल मेडल से भी नवाजा गया है।