Skip to content

Desh Ke Is Daur Mein

by Vishwanath Tripathi
Sold out
Original price Rs 125.00
Current price Rs 112.00
Add Rs 500.00 or more in your cart to get Free Delivery
Free Reading Points on every order
Binding
परसाई जी पर आपकी किताब मिल गई और पढ़ ली गई । अपने देश व समाज से, मानवता से आप जिस गहराई तक जुड़े हैं, उस पर अचंभा होता है । आपके लेखन से ताकत मिलती है । बहुत-सी चीजें साफ होती हैं । परसाई जी का मैं प्रशंसक हूँ आज से नहीं, बहुत पहले से । हिंदी में आज तक ऐसा हास्य-व्यंग्यकार नहीं हुआ । आपने बहुत बड़ा काम किया है । परसाई जी की जीवनी और कृतित्व दोनों को मिलाकर एक पुस्तक लिखी जानी चाहिए । -अमरकान्त परसाई पर विश्वनाथ त्रिपाठी ने पहली बार गंभीरता से विचार किया है । यह अभी तक की एक अनुपम और अद्वितीय पुस्तक है, जिसमें परसाई के रचना-संसार को समझने और उद्‌धाटित करने का प्रयास किया गया है । -ज्ञानरंजन परसाई का लेखन डी. विश्वनाथ त्रिपाठी के चिंतन के करीब पड़ता है । वे अपने चिंतन को परसाई की रचना से पुष्ट और समृद्ध करते हैं । परसाई जी के निबंधों की उन्होंने बहुत् तरह से, बहुत कोणों से जाँच-पड़ताल की है-वर्तमानता की दृष्टि से, मनोविकारों की दृष्टि से, कला की दृष्टि से और रूप की दृष्टि से । -बलीसिंह