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Dhara Ankurai

by Asghar Wajahat
Original price ₹ 199.00
Current price ₹ 179.00
Binding
Product Description
प्रतिष्ठित कथाकार असगर वजाहत की उपन्यास-त्रयी का अन्तिम भाग 'धरा अँकुराई' एक बहुआयामी कथानक को जीवन की सच्चाइयों तक पहुँचाता है। 'कैसी आगी लगाई' और 'बरखा रचाई' शीर्षक से त्रयी के दो भाग पूर्व में प्रकाशित होकर पर्याप्त प्रशंसा प्राप्त कर चुके हैं। अनेक विवरणों, वृत्तान्तों, परिस्थितियों और अन्त: संघर्षों से गुज़रती यह कथा-यात्रा 'जीवन के अर्थ' का आईना बन जाती है। एक दीगर प्रसंग में आया वाक्य है, '...यह यात्रा संसार के हर आदमी को जीवन में एक बार तो करनी ही चाहिए।' यह अन्त:यात्रा है। इससे व्यक्ति जहाँ पहुँचता है वहाँ एक प्रश्न गूँज रहा है कि आखिर इस जीवन की सार्थकता व प्रासंगिकता क्या है। उपन्यास-त्रयी के तीन प्रमुख पात्रों में से एक सैयद साजिद अली, जिन्होंने पत्रकारिता की कामयाब जि़न्दगी जी है, महसूस करते हैं कि उनके भीतर एक खालीपन फैलता जा रहा है। लगता है कि अब तक जिया सब बेम$कसद रहा। सैयद साजिद अली 'जि़न्दगी का अर्थ' समझने के लिए उसी छोटी सी जगह लौटते हैं, जहाँ से निकलकर वे जाने कहाँ-कहाँ गए थे। उपन्यासकार ने छोटी-छोटी घटनाओं के ज़रिए व्यक्ति और समाज की कशमकश को शब्द दिए हैं। प्रवाहपूर्ण भाषा ने पठनीयता में इज़ा$फा किया है। मौके-ब-मौके उपन्यास में वर्तमान की समीक्षा भी है, ''जनता का पैसा किसी का पैसा नहीं है। यह माले-मु$फ्त है जो हमारे देश में बेदर्दी से बहाया जाता है और इसकी बारिश में अ$फसर, नेता और ठेकेदार नहाते हैं। हमने लोकतंत्र के साथ-साथ 'विकास' का भी एक विरला स्वरूप विकसित किया है जो कम ही देशों में देखने को मिलेगा।'' एक पठनीय व संग्रहणीय उपन्यास।