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Dilli Ke Etihasik Gurdware (Historical Gurdwaras of Delhi) (Bahuvachan)

M. K. Pal (Author)

Rs 795.00 Rs 455.00

Description

Author: M. K. Pal

Languages: Hindi

Number Of Pages: 184

Binding: Hardcover

Package Dimensions: 7.6 x 7.1 x 0.2 inches

Release Date: 07-01-2019

Details: एक प्रसिद्ध इतिहासकार और कला, शिल्प और सामाजिक-सांस्कृतिक अध्ययन के विशिष्ट विद्वान एम.के. पाल द्वारा लिखित ‘दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारे, एक गहन अनुसंधान और अध्ययन का परिणाम है जो इन धार्मिक स्थलों के महत्त्व और उनकी ऐतिहासिक और सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को उजागर करती है। सिख इतिहास के अनुसार कई गुरुओं के चरण पड़ने से पवित्र हुए गुरुद्वारे दिल्ली शहर के विभिन्न हिस्साें में स्थित हैं। यह पुस्तक एक महान सिख धर्म के अनुयायियों के लिए इन तीर्थों के महत्व को सही ढंग से समझने के लिए आवश्यक प्रासंगिक जानकारी एकत्र करने का प्रयास करती है। इस पुस्तक से कई दिलचस्प दंतकथाओं और प्रत्येक गुरुद्वारे के निर्माण से जुड़ी कहानियों का पता चलता है, जो गुरुओं द्वारा अपने धर्म और आस्था के लिए किये गये संघर्ष और कठिनाइयों के अनुस्मारक के रूप में मौजूद है और आज भी सिख समुदाय के हृदय और मानस में सिख धर्म की आत्मा को जीवन्त रखने में सहायक है। Historical gurdwaras of Delhi by M.K. Pal, a noted art historian and a distinguished scholar in arts, crafts and socio-cultural studies, is the result of an in-depth research study that brings to the fore the importance of these shrines and their compelling historical and socio-cultural background. These gurdwaras, many of which according to Sikh chronicles are consecrated by the gurus’ visits, are located in different parts of the city of Delhi. This book attempts to thread together the relevant information considered necessary to rightly understand the importance of these shrines for the followers of a great religion, Sikhism. The book reveals many intriguing legends and stories associated with the making of each of these gurdwaras which stand as reminders of the struggles and hardships faced by the gurus in upholding their faith and helps in keeping the spirit of Sikhism alive in the minds and psyche of the Sikh population even today.