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Description

Author: Shriprasad

Languages: Hindi

Number Of Pages: 22

Binding: Perfect Paperback

Release Date: 01-12-2022

किस भाषा को ऐसी रचनाओं पर फक्र नहीं होगा! इस कविता में भाषा का और देखने का एक महीन खेल और कारीगरी है। हाथी को चलते देखिए। वह एक कदम चलता है तो सूँड से लेकर पूँछ तक चलने की एक लहर-सी उठती है। जैसे, पानी पर कोई "चलना' लिखे और उसी समय एक लहर आ जाए तो "चलना' अक्षरों में टूट जाएगा। ध्वनि के संसार में हाथी के चलने को चल्लम कहने में यही जादू है। हाथी हिलता है तो कुछ देर हिलता रहता है। हाथी चलता है तो कुछ देर चलता रहता है। हाथी का आना और जाना एक झटके में नहीं हो जाता। वह थोड़ी देर होता रहता है। कवि श्रीप्रसाद इस कालजयी कविता में इन सब बातों को पिरोकर एक नायाब खेल रचते हैं। इस कविता में बहुत कम शब्द हैं जो साबुत अक्षरों से बने हैं। इससे इस कविता में अनोखी मटक आ गई है। चित्रकार प्रोइति रॉय ने शब्दों के इस कमाल के लिए पूरी जगह छोड़कर सादे चित्र रचे हैं। वे इस विशाल दृश्य की हर व्यक्ति की अपनी कल्पना को बची रहने देते हैं। और बचकर अपनी बात कहते हैं। ISBN - 9789392873188