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Hindi Kahaniyon Ki Shilp-Vidhi Ka Vikas

by Laxmi Narayan Lal
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हिंदी कहानी-साहित्य अन्य साहित्यांगो की अपेक्षा अधिक गतिशील है । मासिक और साप्ताहिक पत्र-पत्रिकाओं के नियमित प्रकाशन ने इस साहित्य के विकास में बहुत अधिक योग दिया है । फलस्वरुप कहानी-साहित्य में सर्वाधिक प्रयोग हुए हैं और कहानी किसी निर्झरिणी की गतिशीलता लेकर विविध दिशाओं में प्रवाहित हुई है । इस वेग में मर्यादा रहनी चाहिए । बरसात में किसी नदी के किनारे कमजोर हों तो गाँव और नगर में पानी भर जाता है । इसलिए वेग को विस्तार देने की आवश्यकता है । प्रवाह में गंभीरता आणि चाहिए । मनोरंजन की लहरें उठाने वाला कहानी-साहित्य, तट को तोड़कर बहने वाला साहित्य नहीं है । उसमें जीवन की गहराई है--जीवन का सत्य है । दिग्वधू को घंश्यमल केशराशि में सजा हुआ इंद्राधनुष बालकों का कुतूहल ही नहीं है, वह प्रकृति का सत्य भी है । कितनी प्रकाश-किरणों ने जीवन की बूदों से ह्रदय में प्रवेश कर इस सौन्दर्य-विधि में अपना आत्म-समर्पण किया है । कहानी के इस सत्य को समझने की आवश्यकता है । डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल के इस ग्रन्थ से मैं आशा करता हूँ कि साहित्य-जगत का उत्तरोत्तर हित होगा और विद्वान लेखक का भावी पथ अधिक प्रहस्त बनेगा ।