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Hum Nahin Change...Bura Na Koy

by Surendra Mohan Pathak
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Product Description
लगभग 300 उपन्यास लिखने वाले सुरेंद्र मोहन पाठक ने पल्प फिक्शन को एक नया आयाम देने का काम किया है। इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज़ की नौकरी करते हुए हिंदी पल्प फिक्शन की एक मजबूत धुरी बन जाना एक असाधारण बात थी। ऐसी सफलता रातोरात नहीं आती। इन्हें भी असफलताओं ने चुनौती दी लेकिन निरंतर संघर्ष करते हुए ये लोकप्रिय साहित्य के सिरमौर बने। न केवल अपने लिए एक बड़ा पाठक वर्ग तैयार किया, बल्कि हिंदी लोकवृत्त में पढ़ने की संस्कृति के बढ़ावे पर बात करते रहे। यह किताब उनकी आत्मकथा का एक तरह से दूसरा भाग है। बचपन से कॉलेज के दिनों तक की कथा ‘न बैरी न कोई बेगाना’ किताब में है। उससे आगे बढ़ते हुए संघर्ष के दिनों, जवानी, रोजगार, लेखन और गृहस्थी तक की कथा इस खंड 'हम नहीं चंगे बुरा न कोय' में है.