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Ishq Mein Maati Sona

by Girindra Nath Jha

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Description
प्रेम में होना सिर्फ हाथ थामने का बहाना ढूँढना नहीं होता | दो लोगों के उस स्पेस में बहुत कुछ टकराता रहता है | लप्रेक उसी कशिश और टकराहट की पैदाइश है | - रवीश कुमार गिरीन्द्र नाथ झा के लेखन में शहर और गाँव दोनों अपनी वास्तविकता में एक साथ दिखाई देते हैं | 21वीं सदी में जिस तरह वे आंचलिक जीवन की कथा कहते हैं, वह रेणु की परम्परा को आगे बढ़ानेवाला है | रेणु के उपन्यास मैला आँचल के मेरीगंज की तरह गिरीन्द्र का गाँव चनका भी इस किताब में पूरी तरह दिखाई पड़ता है | - इयान वुल्फोर्ड, द हिन्दू