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Description

Author: Romesh Joshi

Languages: Hindi

Number Of Pages: 148

Binding: Perfect Paperback

Release Date: 01-12-2021

Details: हास्य और व्यंग्य में अंतर होता है, जीवन की संगति को जब विसंगति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तब हास्य उत्पन्न होता है किंतु जब विसंगति को संगति बनाकर लिखा जाए तब वह व्यंग्य हो जाता है। श्री रोमेश जोशी जी की रचनाएँ मारक और मर्मभेदी होती हैं, वे अपनी क़लम से समाज में व्याप्त विकृति को इतने शऊर से उकेरते हैं की हमें वास्तविकता का पता भी चल जाता है और बुरा भी नहीं लगता। वे गुदगुदाते हुए समस्या का उल्लेख भी कर देते हैं और मुस्कुराते हुए समाधान भी सुझा देते हैं। बुंदेलखंड में प्रचलित एक लोकोक्ति श्री रोमेश शर्मा की लेखनी पर सटीक बैठती है - “कनवा से कनवा कहो तो तुरतई जै है रूठ, अरे धीरे-धीरे पूछ लो की कैसे गई थी फूट?” आशतोष राणा (प्रसिद्ध अभिनेता एवं लेखक)