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KHAKI KALAM (ख़ाकी कलम)

by HARI RAM MEENA

Rs 495.00

Description

Author: HARI RAM MEENA

Languages: Hindi

Number Of Pages: 412

Binding: Paperback

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 1.0 inches

Release Date: 12-09-2020

पुलिस के जीवन में जितने विविध अनुभवों से साबक़ा पड़ता है उतने शायद ही किसी दूसरे पेशे में संभव हो । एक तरफ़ चोरों, उचक्कों, दलालों, रंडियों और भड़ुओं की दुनिया है तो दूसरी तरफ़ गरीब गुरबा, सताये पीड़ित लोग हैं और इन के बीच भ्रष्ट राजनीति के साथ संवेदन शून्य तंत्र है । एक पुलिस अधिकारी को इन सबको बड़े क़रीब से देखने का मौका मिलता है । साहित्य जीवन को देखने सुनने के लिये एक नयी दृष्टि देता है । एक संवेदनशील पुलिस अधिकारी, जो सौभाग्य से साहित्यकार भी हो, अपने इर्द गिर्द जो कुछ देखता सुनता है उसे अपने लेखन मे खाद बना कर इस्तेमाल करता है । हरिराम मीणा भी एक ऐसे ही पुलिस लेखक हैं जिन्होंने अपने लम्बे पुलिस जीवन के खट्टे मीठे अनुभवों का पूरी रचनात्मकता के साथ अपने लेखन मे इस्तेमाल किया है । ख़ाकी कलम उनके ऐसे ही अनुभवों का संकलन है । संस्मरणात्मक शैली में ये उनके अपने अनुभव हैं और इन्हें पढ़कर पाठक पुलिस जीवन के उन पक्षों से रू–बरू होता है जिनके बारे में उसने सिर्फ कल्पना ही की होती है । अपनी दिलचस्प शैली प्रवाहमई भाषा के चलते एक बार पढ़ना शुरू कर आप इन लेखों को बीच मे छोड़ नहीं सकते । --विभूति नारायण राय