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Koshish

by Gulzar
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Author: Gulzar

Languages: hindi

Number Of Pages: 84

Binding: Hardcover

Package Dimensions: 8.7 x 3.2 x 0.5 inches

Release Date: 01-01-2017

Details: Product Description साहित्य में ‘मंज़रनामा’ एक मुकम्मिल फॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयाँ अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इंटरप्रेटेशन हो जाता है। मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ा$फा हो गया है। ‘कोशिश’ गुलज़ार की सबसे चर्चित और नई ज़मीन तोडऩेवाली फिल्मों में से है। गूँगे-बहरे लोगों के विषय में एक जापानी फिल्म से प्रेरित होकर उन्होंने हिन्दी में ऐसी एक फिल्म बनाने का जोखिम उठाया और एक मौलिक फिल्म-कृति हिन्दी दर्शकों को दी। फिल्म में कलाकारों के अभिनय और संवेदनशील निर्देशन के कारण इस फिल्म को क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है। यह इसी फिल्म का मंज़रनामा है। About the Author गुलज़ार एक मशहूर शायर हैं जो फिल्में बनाते हैं। गुलज़ार एक अप्रतिम फिल्मकार हैं जो कविताएँ लिखते हैं। बिमल राय के सहायक निर्देशक के रूप में शुरू हुए। फिल्मों की दुनिया में उनकी कविताई इस तरह चली कि हर कोई गुनगुना उठा। एक 'गुलज़ार-टाइप' बन गया। अनूठे संवाद, अविस्मरणीय पटकथाएँ, आसपास की जि़न्दगी के लम्हे उठाती मुग्धकारी फिल्में। परिचय, आँधी, मौसम, किनारा, खुशबू, नमकीन, अंगूर, इजाज़त—हर एक अपने में अलग। 1934 में दीना (अब पाकिस्तान) में जन्मे गुलज़ार ने रिश्ते और राजनीति—दोनों की बराबर परख की। उन्होंने माचिस और हू-तू-तू बनाई, सत्या के लिए लिखा—'गोली मार भेजे में, भेजा शोर करता है... कई किताबें लिखीं। चौरस रात और रावी पार में कहानियाँ हैं तो गीली मिटटी एक उपन्यास। 'कुछ नज़्में, साइलेंसेस, पुखराज, चाँद पुखराज का, ऑटम मून, त्रिवेणी वगैरह में कविताएँ हैं। बच्चों के मामले में बेहद गम्भीर। बहुलोकप्रिय गीतों के अलावा ढेरों प्यारी-प्यारी किताबें लिखीं जिनमें कई खंडों वाली बोसकी का पंचतंत्र भी है। मेरा कुछ सामान फिल्मी गीतों का पहला संग्रह था, छैयाँ-छैयाँ दूसरा। और किताबें हैं : मीरा, खुशबू, आँधी और अन्य कई फिल्मों की पटकथाएँ। 'सनसेट प्वॉइंट', 'विसाल', 'वादा', 'बूढ़े पहाड़ों पर' या 'मरासिम' जैसे अल्बम हैं तो 'फिज़ा' और 'फिलहाल' भी। यह विकास-यात्रा का नया चरण है। बाकी कामों के साथ-साथ 'मिर्जा' गालिब' जैसा प्रामाणिक टी.वी. सीरियल बनाया, कई अलंकरण पाए। सफर इसी तरह जारी है। फिल्में भी हैं और 'पाजी नज़्मों' का मजमुआ भी आकार ले रहा है। चिट्ठी का पता वही है—बोस्कियाना, पाली हिल, बांद्रा, मुम्बई।

  • ISBN: 9788183618359
  • Category: Poetry