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Description

Author: Gulzar

Languages: Hindi

Number Of Pages: 114

Binding: Hardcover

Package Dimensions: 8.7 x 5.6 x 0.5 inches

Release Date: 01-01-2007

Details: मेरे अपने' गुलजार की एक बेहद संवेदनशील फिल्म है । इसकी कहानी के केन्द्र में आनन्दी बुआ नाम की एक वृद्धा स्त्री है जो दूर गाँव में अकेली अपने आखिरी दिन काट रही है । एक दूर का रिश्तेदार अपने घर में आया की कमी पूरी करने के लिए उसे शहर ले जाता है जहाँ जाकर वह पहले तो नए वक्तों के हालात को देखकर चकित होती है, लेकिन फिर शहर के भटके हुए नौजवानों के ऊपर अपनी ममता का आँचल फैला देती अपने तथाकथित रिश्तेदार का घर छोड्‌कर वह उन्हीं लडुकों के साथ रहने लगती है । वे ही उसके अपने हो जाते हैं । इस तरह गुलजार ने अपनी इस फिल्म में समाज में प्रचलित अपने-पराए की अवधारणा को भी नए सिरे से देखने की कोशिश की है और सभ्य सुरक्षित समाज के हाशिये पर जीनेवाले लोगों के मानवीय संवेदना को भी रेखांकित किया है । अंत में वृद्धा दो गुटों की लड़ाई के दौरान अपने प्राण त्याग देती है और इस तरह हम पुन: इस सवाल के रू-ब-रू आ खड़े होते हैं कि आखिर अपना है क्या| गुलजार की फिल्मों में अकसर स्वातंत्रयोत्तर भारत की राजनीतिक स्थितियों पर भी कटाक्ष होता है, वह 'मेरे अपने' में भी है ।