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Mud Mudke Dekhta Hoon

by Rajendra Yadav

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Description

Author: Rajendra Yadav

Languages: Hindi

Number Of Pages: 203

Binding: Hardcover

Package Dimensions: 8.7 x 5.5 x 0.8 inches

Release Date: 01-01-2001

Details: यह मेरी आत्मकथा नहीं है ! इन 'अंतर्दर्शनों' को मैं ज्यादा-से-ज्यादा 'आम्त्काथ्यांश' का नाम दे सकता हूँ ! आत्मकथा वे लिखते हैं जो स्मृति के सहारे गुजरे हुए को तरकीब दे सकते हैं ! लम्बे समय तक अतीत में बने रहना उन्हें अच्छा लगता है ! लिखने का वर्तमान क्षण, वहां तक आ पहुँचने की यात्रा ही नहीं होता, कहीं-न-कहीं उस यात्रा के लिए 'जस्टिफिकेशन' या वैधता की तलाश भी होती है-मानो कोई वकील केस तैयार कर रहा हो ! लाख न चाहने पर भी वहां तथ्यों को काट-छाँटकर अनुकूल बनाने की कोशिशें छिपाए नहीं छिपती: देख लीजिए, मैं आज जहाँ हूँ वहां किन-किन घाटियों से होकर आया हूँ ! अतीत मेरे लिए कभी भी पलायन, प्रस्थान की शरणस्थली नहीं रहा ! वे दिन कितने सुन्दर थे .काश, वही अतीत हमारा भविष्य भी होता-की आकांक्षा व्यक्ति को स्मृति-जीवी, निठल्ला और राष्ट्र को सांस्कृतिक राष्ट्रवादी बनाती है ! जाहिर है इन स्मृति-खण्डों में मैंने अतीत के उन्ही अंशों को चुना है जो मुझे गतिशील बनाए रहे हैं ! जो छूट गया है जो मुझे गतिशील बनाए रहे हैं ! जो छूट गया हेई वह शायद याद रखने लायक नहीं था; न मेरे, न औरों के . कभी-कभी कुछ पीढ़ियाँ अगलों के लिए खाद बनती हैं ! बीसवीं सदी के 'उत्पादन' हम सब 'खूबसूरत पैकिंग' में शायद वही खाद हैं ! यह हताशा नहीं, अपने 'सही उपयोग' का विश्वास है, भविष्य की फसल के लिए .बुद्ध के अनुसार ये वे नावें हैं जिनके सहारे मैंने जिन्दगी की कुछ नदियाँ पार की हैं और सिर पर लादे फिरने की बजाय उन्हें वहीँ छोड़ दिया है|