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Patta Patta Boota Boota

by Kashinath Singh
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काशीनाथ सिंह ने कई विधाओं में रचना की है ! यह उनकी अभी तक असंकलित रचनाओं का संग्रह है जिसमे उनकी कुछ कहानियों के साथ कुछ अन्य गद्य रचनाओं को शामिल किया गया है ! इनमे से कुछ कहानियों को काशीनाथ जी ने ख़ारिज के खाते में दाल रखा था लेकिन किसी भी रचनाकार की संरचना को पूरी तरह समझने के लिए यह आवश्यक है कि उसकी उन रचनाओं को भी पढ़ा जाए जिन्हें वह खुद महत्त्पूर्ण नहीं मानता ! कई बार ऐसा भी होता है कि अपनी जिन चीजों को लेखक बहुत अहमियत नहीं देता, वे वास्तव में पाठकों के लिए बहुत महत्त्पूर्ण साबित होती हैं ! संभव है कि इनमे भी आपको कुछ ऐसी रचनाएँ दिख जाएँ ! काशीनाथ सिंह लोक-बोध से संपन्न रचनाकार रहे हैं ! वे चीजों को वहां से देखने के हिमायती हैं जहाँ हम खड़े होते हैं, वहां से नहीं जहाँ से देखने का रिवाज चल निकलता है और हर कोई जिसे या तो फैशन के चलते या पोलिटिकल करेक्टनेस के कारण अपनाने लगता है ! इस पुस्तक में शामिल रचनाओं में हमें उनकी अपनी दृष्टि से देखि हुई चीजे मिलती हैं जो हमें आगे अपनी दृष्टि विकसित करने, अपने पक्ष को परिभाषित करने का आधार दती हैं ! इस पुस्तकीय प्रस्तुति का उददेश्य काशीनाथ सिंह की पचास वर्षों के व्यापक कालखंड में बिखरे रचना-स्फुलिंगों को एकत्रित करना और उनके उस लेखक को समझना है जो इस बीच बना, साथ ही उसके बनने की प्रक्रिया को भी !