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Patthar Ke Neeche Dabe Hue Hath

by Rajkamal Chaudhari

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Description
पत्थर के नीचे दबे हाथ राजकमल चौधरी की कहानियाँ परमाणु में पर्वत के समावेश की कहानियाँ हैं, जो मानव-जीवन के अनछुए प्रसंगों से उठाकर लाई गई हैं, जिसमें राजकमल की सारी की सारी कहानी-कला मौजूद है और लगता ऐसा है कि इसमें कोई कला नहीं दिखाई गई है। जन-जीवन का सत्य ज्यों का त्यों रख दिया गया है। सच्ची घटनाएँ तो अखबारी रिपोर्टों में बयान होती हैं, कहानी में घटनाएँ सच की तरह आती हैं। घटनाएँ सच हों, इससे ज्यादा जरूरी है कि वे सच लगें भी। राजकमल की कहानियों की यह खास विशेषता है कि वे सारी घटनाएँ सच हों या न हों, सच लगती अवश्य हैं। धर्म, साहित्य, नौकरी, व्यापार, फिल्म, सामाजिक जीवन- यापन...तमाम क्षेत्रों की विकृतियों का इतनी सूक्ष्मता से यहाँ पर्दाफाश किया गया है कि वे अचानक तार-तार हो जाती हैं। छोटे-छोटे स्वार्थों की पूर्ति, क्षणिक मनोवेगों की पुष्टि के लिए मनुष्य किस सीमा तक गिर सकता है; संन्यासी और सिद्ध योगी और यहाँ तक कि देवता की छवि रखनेवाला भी पल-भर में कैसा जानवर हो जाता है; खँूखार जानवर कैसा गऊ हो जाता है; शेर की दहाड़ और आतंक का मालिक पल-भर में कैसे गीदड़, चूहा, केंचुआ, चींटी हो जाता है और रेंगने लगता है- मानव-जीवन की इसी उठा-पटक का एलबम हैं राजकमल की कहानियाँ।