BackBack
Description

Author: Prabhat

Languages: hindi

Number Of Pages: 66

Binding: Perfect Paperback

Release Date: 01-12-2022

कवि प्रभात की कविताओं का यह गुच्छा ज़रा बड़ी कविताओं का है। वो छोटे बच्चे भी इन कविताओं का लुत्फ उठा सकते हैं जो पढ़ना सीख गए हैं। ये कविताएँ कविताएँ हैं। कविताएँ हैं मतलब इनमें ताज़ा भाषा है, ताज़ा कहन है, दृश्यों की ताज़गी है, बात और नज़रिए की ताज़गी है। एक टिटहरी बोल रही है, भोर की राहें खोल रही है। टिटहरी का बोलना आम बात है। लेकिन कविता के एक छोटे से टुकड़े ने उसमें कितने ही नए मायने भर दिए हैं। उसे खास बना दिया है। पहली पंक्त्ति उतनी ही आम रही जैसा कि टिटहरी का बोलना है। दूसरी पंक्त्ति ने उस पहली पंक्त्ति को नए अर्थों से भर दिया। भोर की राह खोलने का क्या मतलब है? क्या टिटहरी जहाँ बोल रही है वहाँ से आवाज़ का एक पुल बन रहा है सुनने वाले के कानों तक! ऐसी कितनी ही उधेड़बुनें कविताएँ हमारे भीतर छोड़ जाती हैं। इस संग्रह के चित्र भार्गव कुलकर्णी ने बनाए हैं। ये चित्र कविताओं का एक इर्दगिर्द बनाते हैं। पानियों की गाड़ियों में वे एक कल्पना सामने लाने की कोशिश करते हैं कि पानियों की गाड़ियाँ कैसी दिखती होंगी। जलंरगों के शानदार नमून । ISBN - 9789392873423