Skip to content
IMPORTANT - you may experience delays in delivery due to lockdown & curfew restrictions. We request you to please bear with us in this extremely challenging situation.
IMPORTANT - you may experience delays in delivery due to lockdown & curfew restrictions. We request you to please bear with us in this extremely challenging situation.

Plato Ke Kavya Siddhant

by Nirmala Jain
Save Rs 21.00
Original price Rs 250.00
Current price Rs 229.00
Add Rs 500.00 or more in your cart to get Free Delivery
Binding
पाश्चात्य काव्य-चिन्तन के इतिहास में प्लेटो की उपस्थिति एक ऐतिहासिक घटना है। काव्य के निषेध के लिए अनुकरण-सिद्धान्त को आधार बनाने के बावजूद उन्होंने काव्य-सृजन और आस्वाद के मूल में सक्रिय सहज मानवीय वृत्तियों की प्रतिष्ठा की। काव्य में नैतिक मूल्यों पर उन्होंने अपेक्षित बल दिया। दर्शन और नैतिक मानदंडों पर आधारित होने पर भी उनका चिन्तन जटिल पारिभाषिक शब्दावली से मुक्त था। सर्जनात्मकता उनकी शैली का प्रमुख आकर्षण है। वे परवर्ती रोमांटिक काव्य-चिन्तन के प्रमुख प्रेरणा स्रोत रहे। इस दृष्टि से उनका स्थायी महत्त्व है। प्रस्तुत पुस्तक उनके योगदान का आकलन करती है। अपनी इस रचना के बारे में प्रख्यात आलोचक निर्मला जैन का कहना है, ‘मुझे अपने आरम्भिक साहित्यिक प्रयास विद्यार्थी मन की जिज्ञासाओं के संपोषण और परितोष का प्रयत्न ही लगते थे। यह इसलिए, कि अंग्रेजी भाषा से अनभिज्ञ पाठक भी इस कृति के माध्यम से प्लेटो के काव्य-सिद्धान्तों की जानकारी हासिल कर सकेगा और इसके लिए अतिरिक्त साधन की अपेक्षा या अपर्याप्तता का बोध उसके मन में नहीं उपजेगा।’ –

Customer Reviews

No reviews yet
0%
(0)
0%
(0)
0%
(0)
0%
(0)
0%
(0)