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Pratinidhi Kahaniyan : Chandrakanta

by Chandrakanta

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Description
चन्द्रकान्ता कश्मीर केन्द्रित अपने विपुल कथा-लेखन के लिए हिन्दी जगत में ख़ासी लोकप्रिय हैं। अपनी कहानियों में उन्होंने देश-विभाजन के तत्काल बाद कश्मीर संकट से उपजे हालात से लेकर 'जेहाद' के नाम पर जारी आतंकवाद से झुलसते कश्मीर की आबोहवा और अवाम के दुःख-दर्द का अद्यतन चित्र उकेरा है, जहाँ वे यथास्थिति का चित्रण-भर करके नहीं रुक जातीं अपितु प्यार, ईमान और इनसानियत से लबरेज़ पात्रों का सृजन कर कट्टरता एवं हिंसा के विरुद्ध पुरज़ोर आवाज़ उठाती हैं। कश्मीर ही नहीं, देश-दुनिया की हर उस मानवीय त्रासदी को चन्द्रकान्ता अपनी कहानियों में जगह देती हैं जिससे एक संवेदनशील रचनाकार का मन आहत एवं उद्वेलित होता है। वे उस भ्रष्ट व्यवस्था और मनुष्य विरोधी तंत्र को कठघरे में खड़ा करती हैं, जिसने तेजी से बदलते समाज में चतुर्दिक संघर्ष से घिरे मनुष्य की आन्तरिक अनुभूतियों को कहीं गहरे दफ़न कर दिया है। व्यक्ति और व्यवस्था की मुठभेड़ में वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक विषम परिस्थिति एवं प्रवृत्ति की समीक्षा करती हैं; तत्पश्चात् उन तथ्यों का अन्वेषण करती हैं जिससे मनुष्य की अन्तरात्मा को मरने से बचाया जा सके और इस प्रकार एक बेहतर कल के लिए मनुष्य के स्वप्नों, संवेदनाओं और स्मृतियों को सिरज लेने की चिन्ता चन्द्रकान्ता की कहानियों का प्रस्थान-बिन्दु बन जाती है।