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Description

Author: Anita Gaur

Languages: Hindi

Number Of Pages: 152

Binding: Paperback

Package Dimensions: 8.3 x 5.3 x 0.5 inches

Release Date: 01-12-2017

Details: Product Description साधना में अभिरुचि रखनेवालों के लिए श्री रमण महर्षि का नाम जाना-पहचाना है। भारत के आध्यात्मिक क्षितिज पर पिछले कुछ वर्षों में जिन नक्षत्रों का उदय हुआ है, उनमें श्री रमण महर्षि का नाम विशेष उल्लेखनीय है। उन्होंने अपने जीवन तथा कार्यों से भारत का नाम आलोकित किया है। भारत के अलावा पश्चिम के कई देशों में अपना उजाला फैलाकर रमण महर्षि ने देश को गौरवान्वित किया है तथा मानव-जाति की बहुमूल्य सेवा की है। 30 दिसंबर, 1879 को सोमवार के दिन आधी रात के लगभग एक घंटे बाद एक जाने-माने प्राचीन ब्राह्मण कुल में जन्म हुआ उस अद्भुत बालक का, जिसे बाद में पूरी दुनिया ने भगवान् श्री रमण महर्षि के नाम से जाना। उन्होंने साधारण जनों को रास्ता बताया कि मानव को उसके दैनिक कार्यों को करते हुए किस प्रकार उस परम तत्त्व की वंदना करनी है, कैसे आत्मा की शुद्धि करके जन्म-मरण के चक्करों से पार पाना है। यदि हम अपने दायित्वों का निर्वाह ही नहीं कर सकते तो हमें इस पृथ्वी पर मानव बनकर रहने का क्या अधिकार है! इस जगत् में ज्ञान की वास्तविक परिभाषा, जीवन की गहराइयाँ महर्षि रमण जैसे ज्ञानी पुरुषों ने ही हमें समझाई है। आध्यात्मिकता के मार्ग का दिग्दर्शन करनेवाले श्री रमण महर्षि की प्रेरणाप्रद जीवनगाथा।. About the Author अनीता गौड़ एक स्वतंत्र लेखिका होने के साथ-साथ टेलीविजन सीरियलों से भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने विभिन्न चैनलों के लिए स्क्रिप्ट लेखन किया है, जिसमें विज्ञान के साथ-साथ कॉमेडी और फिक्शन पर आधारित धारावाहिक भी शामिल हैं। इसके अलावा ब्रॉडकास्ट मीडिया, यानी रेडियो के विभिन्न चैनलों, जैसे विविध भारती, एफएम गोल्ड से प्रसारित होनेवाले धारावाहिकों की स्क्रिप्टिंग के अतिरिक्त कहानियों, वार्त्ताओं, कविता पाठ में समय-समय पर सक्रिय रहती हैं। विभिन्न प्रकाशनों से उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों ने बहुत सराहा है।.