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Description

Author: Hasan Farzook

Languages: Hindi

Binding: Paperback

Release Date: 01-12-2021

इस वक़्त हसन फ़रजौक़ का शे’री मज्मुआ रक़्सम मेरे सामने है, मैं ग़ज़ल पर ग़ज़ल पढ़ता और हैरत मैं मुब्तला होता जा रहा हूँ। आला ग़ज़ल की तमाम ख़ुबियाँ इस शायर को रब्बे-सुख़न की तरफ से वदियत हैं। इसकी शेरी लुग़त महज़ फ़ैशन के तौर पर नहीं बल्कि वो धमाल, रक़्स, औलिया की सर ज़मीन ज़िन्दाने-हिज्र जैसी लफ़्ज़ियात अपने अंदरून से क़शीद करता और हमें हैरत का सामान मुहय्या करता है। दुआ है कि अल्लाह करीम उसकी सूफ़ियाना हौसलामंदी को मज़ीद फ़रोग़ दे और वो इसी तरह अपने क़ारईन के लिए आला ग़ज़ल तख़लीक़ करता रहे।

अब्बास ताबिश