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Rashmi Lok : Dinkar Granthmala

by Ramdhari Singh Dinkar
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Product Description
हमारे क्रान्ति-युग का सम्पूर्ण प्रतिनिधित्व कविता में इस समय दिनकर कर रहा है । क्रान्तिवादी को जिन-जिन हृदय-मंथनों से गुजरना होता है, दिनकर की कविता उनकी सच्ची तस्वीर रखती है । - रामवृक्ष बेनीपुरी दिनकर जी सचमुच ही अपने समय के सूर्य की तरह तपे । मैंने स्वयं उस सूर्य का मध्याह्न भी देखा है और अस्ताचल भी । वे सौन्दर्य के उपासक और प्रेम के पुजारी भी थे । उन्होंने 'संस्कृति के चार अध्याय' नामक विशाल ग्रन्थ लिखा है, जिसे पं. जवाहरलाल नेहरू ने उसकी भूमिका लिखकर गौरवान्वित किया था । दिनकर बीसवीं शताब्दी के मध्य की एक तेजस्वी विभूति थे । - नामवर सिंह उनकी राष्ट्रीय चेतना और व्यापक सांस्कृतिक दृष्टि, उनकी वाणी का ओज और काव्यभाषा के तत्त्वों पर बल, उनका सात्त्विक मूल्यों का आग्रह उन्हें पारम्परिक रीति से जोड़े रखता है । - अज्ञेय