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Description

Author: Dr. Jitendra Kumar Soni

Languages: Hindi

Number Of Pages: 96

Binding: Paperback

Package Dimensions: 6.0 x 6.0 x 0.6 inches

Release Date: 03-08-2020

Details: कई दशकों से यह कहा जा रहा है कि हमारा समय कविता का समय नहीं है जबकि कविता का कोई विशेष समय नहीं होता । हर समय कविता का समय है और अकसर कविता समयविद्ध होकर समयातीत की ओर जाती है जो एक स्वाभाविक मानवीय आकांक्षा का हिस्सा है । कई बार यह हमारे ध्यान में नहीं आता कि कविता ही वह प्रकार है जो अच्छे–बुरे दिनों में हमारा साथ देती है, कविता ने मनुष्य का साथ कभी नहीं छोड़ा । अगर कौशल और दृष्टि हो तो जीने का हर मुकाम, पूरा–पड़ोस, लोग–बाग, पशु–पक्षी, वनस्पतियाँ, नदी–पर्वत, जंगल, ब्रह्माण्ड आदि सभी कविता में बान्धे जा सकते हैं । कविता ने अपने लम्बे इतिहास में ऐसा साहस किया है । वह साक्षी भी रही है और सहचर भी । लेखक के काव्य–प्रयत्न को व्यापक सन्दर्भ में देखने की जरूरत है । उनका रेंज काफी फैला हुआ है । टटकी छबियों से लेकर गंभीर सोच–विचार और जटिल भावों तक, ऐन्द्रिय बिम्बों से लेकर सपाटबयानी तक । वे अपने पर्यावरण से रूप–रस–गन्ध उधार लेने की विनम्रता दिखाते हैं और उसके लगातार हो रहे नाश पर कविता में विलाप भी । कुल मिलाकर एक संवेदनशील व्यक्ति की चैकन्नी नागरिकता का यह संग्रह एक दस्तावेज है । -- अशोक वाजपेयी