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Description

Author: Monica Chadha

Binding: Paperback

Package Dimensions: 8.7 x 5.5 x 0.4 inches

Release Date: 01-12-2019

Details: मोनिका की ये नज़्में और ग़ज़लें अपने अतराफ़ और अंदरून के दरमियान एक मुस्तक़िल सफ़र का बयानिया है। एक ऐसा सफर जिसमे एक पत्नी, माँ और बहन का दर्द भी है और साथ ही उन्होंने इस किताब में अपने लफ़्ज़ों से आम लोगो के दर्द को बयान किया है। दिल्ली में मक़ीम और पेशे से फाइनेंसियल मैनेजमेंट के ओहदे पर मोनिका का ज्यादातर वक़्त नंबरो में उलझे रहते हुए निकलता है। बचपन से ही शायरी पसंद होने की वजह से जब भी वह किसी बात में दर्द महसूस करती हैं, तो उसका इज़हार नज़्म या शेर के ज़रिये कर देती हैं। मोनिका ने अपनी पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेन कॉलेज से मुक्कमल की है। उनकी दो बेटियां हैं जो उन्हीं की तरह आला ओहदो पर फ़ायज़ हैं। शायरी के आलावा उन्हें किताबें पड़ना, खाना बनाना व देश-विदेश घूमने का शौक़ है। उनकी ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा है... "जब तक सांस है तब तक चांस है" । इस किताब का नाम "सिलवटें" उनके उस ज़ेहनी हालात को बयान करता है जो उन्होंने अपने हमसफ़र के जाने के बाद महसूस किया है।