Description

Author: Mannu Bhandari

Languages: Hindi, English

Number Of Pages: 144

Binding: Paperback

Package Dimensions: 8.4 x 5.5 x 0.4 inches

Release Date: 01-01-2013

Details: Product Description ‘स्वामी’ सुप्रसिद्ध कथाकार मन्नू भंडारी का भावप्रवण विचारोत्तेजक उपन्यास है! आत्मीय रिश्तो के बीच जिस सघन अंतर्द्वंद का चित्रण करने के लिए मन्नू भंडारी सुपरिचित है, उसका उत्कृष्ट रूप ‘स्वामी’ में देखा जा सकता है! सोदमिनी, नरेन्द्र और घनश्याम के त्रिकोण में उपन्यास की कथा विकसित हुई है! सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितिया तो हैं ही! कथारस के साथ उपन्यास में स्थान-स्थान पर ऐसे प्रश्न उठाए गए हैं जिनकी वर्तमान में प्रसंगिकता स्वयंसिद्ध है! जैसे, ‘जिसे आत्म कहते हैं वह क्या औरतों की देह में नहीं है? उनकी क्या स्वतंत्र सत्ता नहीं है? वे क्या सिर्फ आई थीं मर्दों की सेवा करनेवाली नौकरानी बनाने के लिए? सुदामिनी के जीवन में अथवा इस वृतान्त में ‘स्वामी’ शब्द की सार्थकता क्या है, इसे लेखिका ने इन शब्दों में स्पस्ट किया है- ‘घनश्याम के प्रति उनका पहला भाव प्रतिरोध और विद्रोह का है, जो क्रमशः विरक्ति और उदासीनता से होता हुआ सहानुभूति, समझ, स्नेह, सम्मान की सीढ़ियों को लांघता हुआ श्रद्धा और आस्था तक पहुंचता है; और यहीं ‘स्वामी’ शीर्षक पति के लिए पारस्परिक संबोधन मात्र न रहकर, उच्चतर मनुष्यता का विश्लेषण बन जाता है, ऐसी मनुष्यता जो ईश्वरीय है!’ एक पठनीय और संग्रहणीय उपन्यास! About the Author भानपुरा, मध्य प्रदेश में 3 अप्रैल, 1931 को जन्मी मन्नू भंडारी को लेखन-संस्कार पिता श्री सुखसम्पतराय से विरासत में मिला। स्नातकोत्तर के उपरान्त लेखन के साथ-साथ वर्षों दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में हिन्दी का अध्यापन। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचन्द सृजनपीठ की अध्यक्ष भी रहीं। 'आपका बंटी’ और 'महाभोज’ आपकी चर्चित औपन्यासिक कृतियाँ हैं। अन्य उपन्यास हैं 'एक इंच मुस्कान’ (राजेन्द्र यादव के साथ) तथा 'स्वामी’। ये सभी उपन्यास 'सम्पूर्ण उपन्यास’ शीर्षक से एक जिल्द में भी उपलब्ध है। कहानी संग्रह हैं : एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है, त्रिशंकु, तथा सभी कहानियों का समग्र 'सम्पूर्ण कहानियाँ’, एक कहानी यह भी उनकी आत्मकथ्यात्मक पुस्तक है जिसे उन्होंने अपनी 'लेखकीय आत्मकथा’ कहा है। महाभोज, बिना दीवारों के घर, उजली नगरी चतुर राजा नाट्य-कृतियाँ तथा बच्चों के लिए पुस्तकों में प्रमुख हैं—आसमाता (उपन्यास), आँखों देखा झूठ, कलवा (कहानी) आदि।