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Description

Author: Vinod Kumar Shukl

Languages: hindi

Number Of Pages: 10

Binding: Perfect Paperback

Release Date: 01-12-2022

दो दोस्त हैं। उनकी दोस्ती ऐसी है कि एक की माँ दूसरे की माँ से कहती है, ''मुझे आपका बेटा मेरे बेटे की तरह लगने लगा है।"" वे कभी साथ न होते तो घर वाले पूछते कि उनका झगड़ा हो गया? एक बार जब एक दोस्त अपने दोस्त से नहीं मिलता है तो विनोदजी के लेखन का कमाल देखिए - उसी की चप्पल पहनकर मैं उसे ढूँढने निकला। मैं अपने मन से और चप्पल के मन से चल रहा था कि चप्पल मुझे वहाँ पहुँचा देगी जहाँ वह जाता है। इसी समय कहानी में तीसरे दोस्त का राज़ खुलता है। एक नायाब कहानी। इसके बहुत ही प्रेमिल चित्र अतनु राय ने बनाए हैं। दो दोस्तों के साथ के चित्र, उनकी मुद्राएँ उतनी ही लोच से भरी हैं जितनी लचीली उनकी दोस्ती है। भाषा भी वाक्यों में झूल-झूल जाती है। पूर्ण विराम उतना सीधा नहीं रहता जितना वाक्य के बाद वह आमतौर पर रहता है। ISBN- 9789392873171