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Thaharti Sanson Ke Sirhane Se : Jab Zindagi Mauj Le Rahi Thi

by Ananya Mukherjee
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अनन्या मुखर्जी के शब्दों में कहें तो ‘जब मुझे पता चला कि मुझे ब्रैस्ट कैंसर है, मैं विश्वास नहीं कर सकी। इस ख़बर ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया। लेकिन, जल्द ही मैंने अपने आत्मविश्वास को समेटकर अपने को मजबूत किया। मैं जानती थी कि सब कुछ ठीक हो जाएगा...’ लेकिन पहली बार हुआ कि वो भविष्य के अंधेरों से जीत नहीं पाई। 18 नवंबर 2018 को अनन्या, कैंसर से अपनी लड़ाई हार गईं। लेकिन, अनन्या जीवित हैं, दोस्तों- परिवार की उन खूबसूरत यादों में जिसे वो उनके लिये छोड़ गई हैं। साथ ही, डायरी के उन पन्नों में जो कैंसर की लड़ाई में उनका साथी रहा। यह किताब कैंसर की अंधेरी लड़ाई में एक रोशनी की तरह है (कमरे की खिड़की पर बैठे गंदे कौवे की तुलना अपने एकदम साफ़, बिना बालों के सर से करना), एक कैंसर के मरीज़ के लिए कौन सा गिफ्ट्स उपयोगी है ऐसी सलाह देना (जैसे रसदार मछली भात के साथ कुछ उतनी ही स्वादिष्ट कहानियां एक अच्छा उपहार हो सकता है), साथ ही एक कैंसर मरीज़ का मन कितनी दूर तक भटकता है (जैसलमेर रोड ट्रिप और गंडोला – एक तरह का पारंपरिक नाव – में बैठ इटली के खूबसूरत, पानी में तैरते हुए शहर वेनिस की सैर ‘टेल्स फ्रॉम द टेल एंड’ किताब उम्मीद है, हिम्मत है. यह किताब सुबह की चमकती, गुनगुनाती धूप की तरह ताज़गी से भरी हुई है जो न केवल कैंसर से लड़ते मरीज़ के लिए बल्कि हम सभी के लिए, जो अपने-अपने हिस्से की लड़ाई लड़ते आये हैं, उनके लिए कभी न हार मानने वाली उम्मीद की किरण है. Quote -- ‘शरीर के अंदर बीमारी से लड़ना किसी अँधेरी गुफ़ा के भीतर घुसते जाना है, इस विश्वास के साथ कि इसका अंतिम सिरा रौशनी से भरा होगा । काश, मैं अनन्या से मिलकर उन्हें बता सकता कि उन्होंने कितनी खूबसूरती से कैंसर से लड़ाई की कहानी इस किताब में लिखी है ।‘ – युवराज सिंह Quote -- कैंसर से लडती अनन्या की कहानी जीने का सलीका बताती है । उन छोटी-छोटी तमाम चीजों के लिए शुक्रगुज़ार होना सिखाती है जिसे हम अहमियत नहीं देते । अनन्या की कहानी में उनकी हिम्मत और सच्चाई साफ़ झलकती है, इसे पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि वो पास बैठ इसे सुना रही हैं । - मनीषा कोइराला

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