Skip to product information
  • Vaidhanik Galp freeshipping - Urdu Bazaar
1 of 2

Vaidhanik Galp

by Chandan Pandey
No reviews

Regular price
Rs 144.00
Regular price
Rs 160.00
Sale price
Rs 144.00
Binding

Free Shipping Policy

All prepaid orders are eligible for free shipping. Have more queries? Read more about our shipping and delivery policies here.

Easy Replacement Policy

We have a clear and easy return policy with no question asked. Have more queries? Read more about our return policies here.

100% Genuine Products

We directly source our products from Publishers/Manufacturers.

Secured Payments

We have end to end encryption with our highly optimized payment gateways.

गहरी राजनैतिक, सामाजिक पक्षधरता का गद्य होते हुए भी चन्दन का ‘वैधानिक गल्प’ तीव्र आन्‍तरिक भावनाओं और संवेदनाओं का साथ नहीं छोड़ता। इस मुश्किल जगह से रचे जाने के बावजूद कमाल यह भी है कि यह गल्प के पारम्‍परिक तत्त्वों जैसे–रहस्य, रोचकता और अंतत: पठनीयता को बचाए रखता है। प्यार, क्रूरता और प्रतिरोध चन्दन के यहाँ अपने सूक्ष्म और समकालीन रूपों में प्रकट होते हैं जो न सिर्फ़ चकित करता है बल्कि पाठक की चेतना में कुछ सकारात्मक जोड़ जाता है। —महेश वर्मा चन्दन पाण्‍डेय की लेखकी को समकाल के पूर्ण साहित्यिक विनियोग के रूप में देखा-रखा जा सकता है। चन्दन का कथाकार क़िस्से में ग़ा‌फ़िल नहीं, बल्कि सतर्क व अचूक है, जिससे समकाल के अद्यतन संस्करण का भी प्रवेश उनके कथादेश में सहज ही सम्‍भव है। कहन की साहिबी उन्हें ईर्ष्या का पात्र बनाती है। —कुणाल सिंह Key Selling Points | यह किताब क्यों खरीदें ? एक रात राजधानी दिल्ली के एक लेखक को वर्षों पुरानी किसी महिला मित्र का फ़ोन आता है। वह बताती है कि उसका पति कुछ दिनों से घर नहीं लौटा और यह भी बताती है कि उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अनमनेपन में डूबकर लेखक उस क़स्बे की यात्रा करता है। वहाँ पहुँचकर पाता है कि लापता होने वालों के क्रम में मित्र का पति ही पहला व्यक्ति है। हर ग़ायब होने वाले की दो-दो हक़ीक़त हैं। पहली हक़ीक़त, सबकी अलग-अलग है, विधिसम्मत दायरों में मान्य है। समाज का हर सांस्थानिक तबक़ा नागरिकता की परिभाषा में वर्णित वैधानिक गल्प को सच साबित करने पर तुला है। लेकिन दूसरी हक़ीक़त भी है, जिसमें किसी की दिलचस्पी नहीं सिवाय उनके जो संस्थाओं की मरीचिका में रहते हुए भी प्यार करने का माद्दा रखते हैं। क्या है वो? उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमाने पर एक क़स्बा। क़स्बे का रंगमंच। मंच से लापता होते लोग।