BackBack

Vaigyanik Bhautikvad

by Rahul Sankrityayan

PaperbackPaperback
HardcoverHardcover
Rs 95.00 Rs 85.50
Description
'वैज्ञानिक भौतिकवाद' आज के वैज्ञानिक युग के उस चरण की व्याख्या है जिसमे साइंस के नाम पर मृत विचारों की अपेक्षा नये वैज्ञानिक विचारों व आलोक में मानवीय नैतिकता, धर्म, समाज, दर्शन, मूल्यवत्ता और मानवीय संबंधों की व्याख्या की गयी है | जर्मन दार्शनिक हीगेल ने जिस द्वंद्वात्मक सिद्धांत पर आध्यात्मिकता की व्याख्या की थी, मार्क्स ने उसी द्वंद्वात्मक सिद्धांत के प्रयोग से भौतिकवाद की व्याख्या की | राहुल जी की पुस्तक वैज्ञानिक भौतिकवाद मूलतः द्वंद्वात्मक भौतिकवाद को ही प्रतिपादित करने के लिए लिखी गयी पुस्तक है | पुस्तक को विद्वान लेखक ने तीन मुख्या अध्यायों में बाँटकर, इतिहास, दर्शन, समाजशास्त्र और धर्म आदि की पूरी व्याख्या प्रस्तुत की है | यह पुस्तक राहुल जी ने सबसे पहले 1942 में लिखी थी जबकि देश में गाँधी जी और गांधीवादी का बड़ा प्रबल समर्थन व्याप्त था | इसमें भारतीय सन्दर्भ को लेकर गांधीवाद की विवेचना है | भारतीय चिंतन और दर्शन की दृष्टि से यह पुस्तक सर्वप्रथम भारतीय साहित्य में विशेषकर हिंदी में एक बहुत बड़ी कमी की पूर्ती करती है | दार्शनिक दृष्टि से 'वैज्ञानिक भौतिकवाद' अपनी छोटी-से काया में ही अट्ठारहवी और उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोपीय चिंतन को सूत्र रूप में भारतीय सन्दर्भ के साथ प्रस्तुत करती है | वस्तुतः इस पुस्तक के अध्ययन से कोई भी भारतीय भाषा-भाषी पाश्चात्य चिंतन-प्रणाली को भली-भांति जान सकता है |